इतिहास / पृष्ठभूमि

अंतिम नवीनीकृत : शनिवार, Jul 16 2022 3:38PM

प्रदेश में जल सम्पूर्ति एवं जलोत्सारण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1927 में जन स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का गठन किया गया था। वर्ष 1946 में इसका नाम स्वायत्त शासन अभियंत्रण विभाग कर दिया गया। जून 1975 में यह विभाग उत्तर प्रदेश जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था अधिनियम 1975 (अधिनियम संख्या-43, सन्् 1975) के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश जल निगम में परिवर्तित किया गया।

उक्त अधिनियम के अन्तर्गत 5 कवाल नगरों, बुन्देलखण्ड, गढ़वाल तथा कुमायॅूं क्षेत्रों के लिए एक-एक जल संस्थान भी स्थापित किये गये। वर्तमान में बुन्देलखण्ड क्षेत्र हेतु झॉसी एवं चित्रकूट जल संस्थान कार्यरत है। गढ़वाल तथा कुमायूॅ जल संस्थान उत्तराखण्ड राज्य में सम्मिलित है। सम्प्रति पाँच बड़े नगरों हेतु गठित जल संस्थान का विलय सम्बन्धित नगर निगम लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज व आगरा में हो चुका है एवं इनके द्वारा अपने क्षेत्रों में समस्त पेयजल/जलोत्सारण कार्यों का रख-रखाव किया जाता है।

उ0 प्र0 जल सम्भरण एवं सीवर व्यवस्था (संशोधन) अधिनियम दिनांक-24.08.2021 द्वारा निर्गत किया गया है। इस अधिनियम के प्रावधानानुसार उ0प्र0 जल निगम का उ0 प्र0 जल निगम (नगरीय) तथा उ0 प्र0 जल निगम (ग्रामीण) के रूप में विभाजन किया गया है। प्रदेश के नगरों में जल सम्पूर्ति/जलोत्सारण के निर्माण कार्य जल निगम (नगरीय) द्वारा कराये जाते हैं। नागर क्षेत्रों में कार्यों को पूर्ण करा कर स्थानीय निकायों/जल संस्थानों को रख-रखाव हेतु सौंप दिया जाता है।